जुबिली न्यूज डेस्क
वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े नियमों में बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वक़्फ़ संशोधन विधेयक पेश किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य वक़्फ़ संपत्तियों से जुड़े विवादों को सुलझाना, उनके प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाना और इसमें सरकार की भूमिका को स्पष्ट करना है।
वक़्फ़ क्या है?
वक्फ कोई भी चल या अचल संपत्ति हो सकती है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान कर सकता है। इस दान की हुई संपत्ति की कोई भी मालिक नहीं होता है। दान की हुई इस संपत्ति का मालिक अल्लाह को माना जाता है। लेकिन, उसे संचालित करने के लिए कुछ संस्थान बनाए गए है।
विधेयक में क्या प्रस्तावित है?
पुरानी वक़्फ़ संपत्तियों को सुरक्षित रखा जाएगा – पहले से वक़्फ़ की गई संपत्तियों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार की भूमिका बनी रहेगी – राज्य सरकारें वक़्फ़ बोर्ड के संचालन और प्रशासन की निगरानी करती रहेंगी।
वक़्फ़ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य भी होंगे – अब वक़्फ़ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जाएगा।
वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में तीन सदस्य होंगे – विवादों को हल करने के लिए गठित वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में अब तीन सदस्य होंगे, जिससे फैसलों में अधिक पारदर्शिता आएगी।
जांच की प्रक्रिया में बदलाव – पहले कलेक्टर वक़्फ़ संपत्तियों की जांच करते थे, लेकिन अब यह जिम्मेदारी एक वरिष्ठ अधिकारी को दी जाएगी।
वक़्फ़ के लिए न्यूनतम समयसीमा – अब कोई व्यक्ति कम से कम 5 साल तक इस्लाम धर्म मानने के बाद ही वक़्फ़ कर सकेगा।
2025 से पहले वक़्फ़ की गई संपत्तियां ही मान्य होंगी – जो संपत्तियां 2025 से पहले वक़्फ़ की गई हैं, उन्हें ही मान्यता दी जाएगी।
धर्मार्थ कार्यों में लगी ट्रस्ट संपत्तियों पर लागू नहीं होगा – यदि कोई ट्रस्ट पहले से किसी धर्मार्थ कार्य में संपत्ति का उपयोग कर रहा है, तो इस विधेयक का उस पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
वक्फ बोर्ड कितनी संपत्तियों पर नियंत्रण रखता है?
वक्फ बोर्ड वर्तमान में भारत भर में 9.4 लाख एकड़ में फैली 8.7 लाख संपत्तियों को नियंत्रित करता है, जिसका अनुमानित मूल्य 1.2 लाख करोड़ रुपये है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी वक्फ होल्डिंग है। इसके अलावा, सशस्त्र बलों और भारतीय रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड भारत में सबसे बड़ा भूस्वामी है ।
सरकार को क्यों पड़ी इसे लाने की जरुरत
केंद्र सरकार को मुसलमानों और गैर-मुसलमानों से वक्फ भूमि पर जानबूझकर अतिक्रमण और वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन जैसे मुद्दों पर बड़ी संख्या में शिकायतें और अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। मंत्रालय ने प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और मात्रा का विश्लेषण किया है और पाया है कि अप्रैल, 2023 से प्राप्त 148 शिकायतों में ज्यादातर अतिक्रमण, वक्फ भूमि की अवैध बिक्री, सर्वेक्षण और पंजीकरण में देरी और वक्फ बोर्डों और मुतवल्लियों के खिलाफ शिकायतों से संबंधित हैं।
मंत्रालय ने अप्रैल, 2022 से मार्च, 2023 तक सीपीजीआरएएमएस (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों का भी विश्लेषण किया है और पाया है कि 566 शिकायतों में से 194 शिकायतें वक्फ भूमि पर अतिक्रमण और अवैध रूप से हस्तांतरण से संबंधित थीं और 93 शिकायतें वक्फ बोर्ड/मुतवल्लियों के अधिकारियों के खिलाफ थीं।
इसके अलावा, सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में देरी, वक्फ बोर्ड द्वारा बाजार मूल्य से कम किराया लेने, वक्फ भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, विधवाओं के उत्तराधिकार अधिकार, सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा सर्वेक्षण पूरा न करने, वक्फ संपत्ति रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की धीमी प्रगति आदि के मुद्दे उठाए।
विपक्ष का विरोध क्यों?
विपक्षी दलों का कहना है कि इस विधेयक से सरकार वक़्फ़ संपत्तियों पर अपना नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों ने आरोप लगाया कि विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्तियों के प्रबंधन में सरकार का दखल बढ़ाएगा।
कई विपक्षी नेता इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं और सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि इस संशोधन से वक़्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन पारदर्शी होगा और बेनामी संपत्तियों को रोकने में मदद मिलेगी।नए बदलावों से धोखाधड़ी और अवैध कब्जों पर रोक लगाई जा सकेगी।सरकार का दावा है कि विपक्ष बिना वजह इस विधेयक का राजनीतिकरण कर रहा है।
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वक़्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच भारी मतभेद है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता और सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे वक़्फ़ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास कह रहा है। अब देखना होगा कि यह विधेयक संसद में किस तरह से आगे बढ़ता है और क्या इसमें कोई बदलाव किए जाते हैं।