जुबिली न्यूज डेस्क
केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया। इस बिल को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में रखा। सरकार ने इस बिल पर 8 घंटे की चर्चा का समय तय किया है, लेकिन विपक्ष ने इसे 12 घंटे करने की मांग की।
विपक्ष का विरोध और हंगामा
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित कई विपक्षी दलों ने इस बिल का जोरदार विरोध किया।संसद में हंगामा हुआ और विपक्ष ने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी इस बिल को साजिश करार दिया और आंदोलन की चेतावनी दी।
सरकार ने मुसलमानों को दिए 5 प्रमुख आश्वासन
मस्जिदों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी – इस बिल में धार्मिक स्थलों से जुड़ी किसी भी तरह की कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
धार्मिक स्थलों के संचालन में कोई दखल नहीं होगा – मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थलों के संचालन में सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
वक्फ बोर्ड का संचालन कानून के दायरे में होगा – नया कानून वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन को सुनिश्चित करेगा, लेकिन मौजूदा वक्फ कानूनों के खिलाफ कुछ नहीं किया जाएगा।
विवादित जमीनों के मामलों को वरिष्ठ अधिकारी देखेंगे – अब कलेक्टर से ऊपर के अधिकारी ही सरकारी या विवादित जमीनों के मामलों को देखेंगे।
वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिमों की सीमित संख्या – 22 सदस्यों की वक्फ काउंसिल में 4 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे।
विपक्ष की आपत्तियां
कांग्रेस का आरोप – कुछ प्रावधान वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने वाले हैं।
समाजवादी पार्टी और AIMIM का आरोप – सरकार वक्फ संपत्तियों की निगरानी के नाम पर दखल देना चाहती है।
AIMPLB की चेतावनी – यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।
सरकार का पक्ष
सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करेगा।
अवैध कब्जों को रोकने और विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
किसी भी धार्मिक गतिविधि में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
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आगे क्या होगा?
विधेयक पर 8 घंटे तक चर्चा होगी, जिसके बाद मतदान किया जाएगा। यदि यह विधेयक लोकसभा में पारित होता है, तो इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। सरकार के पास बहुमत होने के कारण इस बिल के पास होने की संभावना ज्यादा है। अब देखने वाली बात होगी कि विपक्ष की मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है और यह बिल कितना विवादास्पद साबित होता है।