जुबिली स्पेशल डेस्क
देहरादून/लखनऊ/कर्णप्रयाग: उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री, प्रख्यात राजनेता एवं साहित्यकार डॉ. शिवानंद नौटियाल की 89वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग में आयोजित कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. वी.एन. खाली ने कहा कि डॉ. नौटियाल एक युगदृष्टा थे, जिनका योगदान सदियों तक याद रखा जाएगा।
इस अवसर पर डॉ. शिवानंद नौटियाल विकास मंच के संयोजक भुवन नौटियाल ने उन्हें एक महान शिक्षाविद और समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तकों के माध्यम से जनसमस्याओं को जनता तक पहुंचाने का कार्य किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभा
डॉ. शिवानंद नौटियाल की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। उनके उत्तराखंड स्थित पैतृक गांव कोठला सैंजी, कर्णप्रयाग और पौड़ी गढ़वाल में श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया गया।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी नौटियाल जी की स्मृति में एक विशेष सभा आयोजित की गई, जिसमें उनके सहयोगी वरिष्ठ राजनेता, साहित्यकार और रंगकर्मी शामिल हुए। गढ़वाल मंडल बहुउद्देशीय सहकारी समिति के पदाधिकारियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों तथा जनकल्याणकारी नीतियों पर चर्चा की।
उत्तरांचल डॉ. शिवानंद नौटियाल फाउंडेशन, लखनऊ में भी एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ, जिसमें वरिष्ठ राजनेता, साहित्यकार और उनके परिवारजन उपस्थित रहे। इस सभा का आयोजन उनके पुत्र दिव्य नौटियाल (उत्तराखंड राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष) ने किया। उनके पुत्र विवेक नौटियाल ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला, जबकि ज्येष्ठ पुत्र कमल नौटियाल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
शिक्षा, साहित्य और राजनीति के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान
डॉ. शिवानंद नौटियाल का जन्म 26 जून 1926 को पौड़ी जनपद के ग्राम कोटला में हुआ था। उन्होंने 1967 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1969 में पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र से विधायक चुने गए। वर्ष 1974 और 1979 में पुनः विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। उन्हें दो बार पौड़ी से और छह बार कर्णप्रयाग से विधायक बनने का अवसर मिला।
वर्ष 1979 में उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें उच्च शिक्षा एवं पर्वतीय विकास मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया। अपने कार्यकाल में उन्होंने उत्तराखंड क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार के लिए अभूतपूर्व कार्य किए।
साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. नौटियाल एक प्रख्यात साहित्यकार भी थे। उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं:
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गढ़वाल के लोकनृत्य गीत
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गढ़वाली लोकमानस
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गढ़वाल के नृत्य
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गढ़वाल के लोकगीत
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गढ़वाल के खुदेड़ गीत
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हम यह बाजला
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नेफा की लोककथाएं
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कुमाऊँ दर्शन
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बदरी केदार की ओर
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने उनके साहित्यिक योगदान के लिए आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार से सम्मानित किया था।
2004 में हुआ निधन
डॉ. नौटियाल राजनीति और सामाजिक कार्यों में लगातार सक्रिय रहे। वर्ष 2004 में निमोनिया के कारण उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2 अप्रैल 2004 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
आज, उनकी 89वीं पुण्यतिथि पर लखनऊ, देहरादून और कर्णप्रयाग सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर उनके अविस्मरणीय योगदान को याद किया गया।