जुबिली न्यूज डेस्क
कोलकाता, पश्चिम बंगाल में 25,753 शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों की नौकरी पर बड़ा संकट आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 2016 की पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (SSC) भर्ती प्रक्रिया को अवैध घोषित किया गया था। इस फैसले के चलते हजारों शिक्षक बेरोजगार हो सकते हैं।
क्या है मामला?
2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (SSC) द्वारा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। लेकिन इस प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने अप्रैल 2024 में इसे रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि इन शिक्षकों को मिली सैलरी वापस ली जाए। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे इसे लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
कितने लोग होंगे प्रभावित?
- करीब 25,753 शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी इस फैसले से प्रभावित होंगे।
- कुछ विशेष मामलों में राहत दी गई है, जैसे कैंसर पीड़ित शिक्षकों को।
- कई शिक्षक, जिन्होंने सालों तक स्कूलों में पढ़ाया, अब विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
राजनीतिक हलचल और प्रतिक्रियाएँ
इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है।
- टीएमसी सरकार: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे शिक्षकों के साथ अन्याय करार दिया और कहा कि वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।
- बीजेपी: विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी जीत बता रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि यह फैसला राज्य सरकार की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी को उजागर करता है।
- शिक्षक संघ: प्रभावित शिक्षक संघ ने इसे “अन्यायपूर्ण” बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
क्या होगा आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पश्चिम बंगाल में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ेगा। सरकार के पास अब दो ही विकल्प हैं—या तो इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे या नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करे।
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इस फैसले ने हजारों शिक्षकों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। वहीं, पश्चिम बंगाल में यह मामला राजनीतिक तकरार का नया कारण बन गया है। अब यह देखना होगा कि सरकार और प्रभावित शिक्षक इस फैसले के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं।