जुबिली न्यूज डेस्क
उत्तर कन्नड़ जिले में चालीस साल पहले कैरब के बीजों पर एंडोसल्फान का छिड़काव किया गया था, जिसका असर अब भी देखा जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप आज भी काजू बागानों के आसपास के इलाकों में पैदा होने वाले बच्चे विकलांगता के साथ जन्म ले रहे हैं। यह स्थिति उस समय के रासायनिक छिड़काव के असर को दर्शाती है, जैसे कि हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु विस्फोटों के बाद भी उन देशों में विकलांग बच्चों का जन्म होता है।
1985 से 2010-11 तक के समय में एंडोसल्फान के छिड़काव का प्रभाव अब भी बना हुआ है, जिससे उत्तर कन्नड़ सहित दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में विकलांगता के मामलों में वृद्धि देखी गई है। उत्तर कन्नड़ में 1,793 लोग विकलांगताओं से प्रभावित हुए हैं। इस पर 2015-16 में एक सर्वेक्षण किया गया था और फिर 2024 में इसकी पुनः जाँच की गई, जिसमें 631 नए विकलांग मामलों का पता चला।
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उत्तर कन्नड़ के डीएचओ डॉ. नीरज ने बताया कि पहले चरण में उन लोगों का पता किया गया जो एंडोसल्फान के प्रभाव से प्रभावित हुए थे, और अब दूसरे चरण में उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्हें पहले सर्वेक्षण में नहीं शामिल किया गया था। इस दौरान यह भी संभावना जताई गई कि एंडोसल्फान का प्रभाव दूसरी पीढ़ी पर भी पड़ रहा है और इसकी गहरी जांच की आवश्यकता है। खास बात यह है कि सर्वेक्षण में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों में इस प्रभाव के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।