Friday - 28 March 2025 - 4:12 PM

महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु का प्रश्न

अशोक कुमार

सेवानिवृत्ति आयु एक महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दा है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित करते समय कई कारकों पर विचार किया जाना चाहिए, जिनमें शामिल हैं ! जनसांख्यिकीय परिवर्तन के आधार पर औसत जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई है, इसलिए सेवानिवृत्ति की आयु को तदनुसार समायोजित किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि शिक्षक 65 वर्ष की आयु तक प्रभावी ढंग से काम करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हों।

 

शिक्षा राज्य का विषय है, और राज्य सरकारों को सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित करने का अधिकार होना चाहिए। कुछ राज्य सरकारों के द्वारा शिक्षकों के अनुभव का लाभ उठाने के लिए सेवानिवृत्ति की आयु को बढ़ाया गया है।

यह शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता ! वर्तमान में, भारत में महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सभी राज्यों में एक समान नहीं है। कुछ राज्यों में यह 60 वर्ष है, जबकि कुछ राज्यों में यह 62 या 65 वर्ष है। राजस्थान मे सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष है ! यह असमानता समाप्त होना आवश्यक है। एक समान सेवानिवृत्ति आयु सुनिश्चित करने से शिक्षकों के लिए समान अवसर उपलब्ध होंगे और वे अपने अनुभव का पूरा लाभ विद्यार्थियों को दे सकेंगे। यूजीसी ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित की है। यूजीसी के अनुसार, सेवानिवृत्ति आयु को इस तरह से निर्धारित किया जाना चाहिए जिससे शिक्षक अपने काम को प्रभावी ढंग से जारी रख सकें। अनुभवी शिक्षक अपने छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकते हैं। इसलिए, ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिससे शिक्षक अपने अनुभव को छात्रों के साथ साझा कर सकें। इसके बावजूद महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में सेवानिवृत्ति आयु में भिन्नता बनी हुई है।
शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।

अनुभवी शिक्षक अपने छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन और निर्देश दे सकते हैं। वे छात्रों को शोध और नवाचार के लिए प्रेरित कर सकते हैं। शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से युवा प्रतिभाओं को अवसर मिलेगा। जब शिक्षक लंबे समय तक सेवा देते हैं, तो युवा प्रतिभाओं के लिए अवसर कम हो जाते हैं। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने और नए विचारों को पेश करने का मौका मिलेगा। शिक्षकों के लिए

पेशेवर विकास को बढ़ावा देना: सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से शिक्षकों को अपने पेशेवर विकास के लिए अधिक समय मिलता है। वे नए कौशल और ज्ञान सीख सकते हैं, और अपने छात्रों को अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ा सकते हैं।

शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना: अनुभवी शिक्षक आमतौर पर अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ होते हैं। वे अपने छात्रों को अधिक गहन और जानकारीपूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।

विभिन्न राज्य सरकारों ने हाल ही में चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा को 65 वर्ष कर दिया है। इसके बाद, विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा को 65 वर्ष करने की मांग उठ रही है। भारतवर्ष में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, और सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाने से अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं अधिक समय तक उपलब्ध रहेंगी। इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी, क्योंकि विशेषज्ञ डॉक्टर अधिक समय तक सेवा में रहेंगे। माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया था।

विश्वविद्यालयों में भी अनुभवी शिक्षकों की कमी है, और सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाने से छात्रों को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा। गुणवत्ता में सुधार होगा। जब चिकित्सा क्षेत्र में आयु सीमा बढ़ाई जा सकती है, तो विश्वविद्यालयों में भी ऐसा किया जाना चाहिए।हालांकि, इस निर्णय के कुछ संभावित नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं:सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ने से युवा डॉक्टरों और शिक्षकों के लिए अवसर कम हो सकते हैं।

इससे पदोन्नति की प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिससे कुछ कर्मचारियों में असंतोष हो सकता है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने आयुर्वेद चिकित्सकों के मामले में भी राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उनकी सेवानिवृत्ति आयु एलोपैथी चिकित्सकों के समान ही 62 वर्ष की जाए।राजस्थान सरकार ने डॉक्टरों की रिटायरमेंट को लेकर एक बड़ा फैसला किया है जिसके तहत अब डॉक्टर्स के रिटायरमेंट की उम्र 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने का फैसला किया गया है। यदि शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ जाती है, तो युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के अवसरों को सुनिश्चित करने के लिए कई रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं !

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शिक्षा संस्थानों में नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जैसे कि सहायक प्रोफेसर, शोध सहायक, और तकनीकी कर्मचारी। नई शिक्षा नीतियों और कार्यक्रमों के तहत अतिरिक्त शिक्षकों की भर्ती की जा सकती है। राज्य सरकारों को अपनी नीतियों में बदलाव लाना होगा, और युवा पीढ़ी के लिए अलग से रोजगार को सुनिश्चित करने के लिए योजनाएं बनानी होगी। नई शिक्षा निति के तहत, युवाओं के लिए विशेष योजनाएं बनानी होगी।इन उपायों को लागू करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि के बावजूद, युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध रहें।

(लेखक पूर्व कुलपति कानपुर , गोरखपुर विश्वविद्यालय , विभागाध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर हैं)

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