न्यूज डेस्क
योगी सरकार में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया गया है। संघ के अच्छे रिश्ते रखने वाले स्वतंत्र देव प्रधानमंत्री के भी खास माने जाते हैं। स्वतंत्र देव सिंह बुंदेलखण्ड से ताल्लुक रखते हैं और बीजेपी के बड़े कुर्मी चेहरे के रूप जाने जाते हैं।
जानकारों की माने तो बीजेपी ने स्वतंत्र देव सिंह को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बना कर ओबीसी जाति के वोटरों को लुभाने के लिए बड़ा कदम चला है। स्वतंत्र देव सिंह ओबीसी जाति के समीकरणों के हिसाब से बिलकुल फिट बैठ रहे हैं। वह कुर्मी समाज से आते हैं और उरई के रहने वाले हैं।
स्वतंत्र देव सिंह पीएम मोदी के काफी करीबी हैं। उन्होंने बीजेपी में कार्यकर्ता से लेकर संगठनकर्ता तक का सफर तय किया है। लोकसभा चुनाव से लेकर यूपी विधानसभा चुनाव तक पीएम मोदी की सभी रैलियों को सफल बनाने का जिम्मा उन्हीं के पास था और अपनी संगठन क्षमता को उन्होंने साबित भी किया है।
वह एक बार एमएलसी भी रह चुके हैं। आरएसएस स्वयंसेवक रहे स्वतंत्र देव सिंह की छवि काफी ईमानदार है। इतने सालों से राजनीति में रहे स्वतंत्र देव के पास संपत्ति के नाम पर एक ही दोपहिया वाहन है।
स्वतंत्र देव सिंह के बारे में बताया जाता है कि वह विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की रैली को सफल बनाने के लिए शहरों में जाकर वहीं काम जमीन में जुड़कर काम करने लगते थे। उनके पास बूथ से लेकर मंडल स्तर तक के कार्यकर्ताओं की जानकारी रखते हैं।
स्वतंत्र देव सिंह की बैठक में सभी कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ जाना होता है। वह किसी से भी बूथ स्तर तक की जानकारी मांग सकते हैं. उनकी कार्यशैली के हिसाब से वह पीएम मोदी को काफी जंचते हैं।
स्वतंत्रदेव सिंह का सियासी सफर
1986- आरएसएस प्रचारक बने.
1988-89-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में संगठन मंत्री.
1991- भाजपा कानपुर के युवा शाखा के मोर्चा प्रभारी.
1994- बुन्देलखण्ड के युवा मोर्चा के प्रभारी.
1996-युवा मोर्चा का महामन्त्री.
1998- फिर से भाजपा युवा मोर्चा का महामंत्री.
2001- भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष.
2004- विधान परिषद के सदस्य.
2004 प्रदेश महामंत्री बने.
2004 से 2014 तक दो बार प्रदेश महामंत्री.
2010- प्रदेश उपाध्यक्ष बने.
2012- महामंत्री बने
2017- योगी सरकार में परिवहन मंत्री
2019- बीजेपी अध्यक्ष
स्वतंत्र देव सिंह कभी पत्रकारिता किया करते थे। छात्र राजनीति के बीच वह 1989-90 में ‘स्वतंत्र भारत’ अखबार से जुड़े। उरई में वह इसके रिपोर्टर रह चुके हैं। स्वतंत्र देव सिंह बेहद गरीबी में पले-बढ़े हैं। छात्र जीवन में ही राजनीति से जुड़े, लेकिन कभी भी करिश्माई सफलता नहीं मिली। कॉलेज में छात्र संघ चुनाव हारे। 2012 में एमएलए इलेक्शन भी बुरी तरह से हारे।
स्वतंत्र देव सिंह मूल रूप से मिर्जापुर के रहने वाले हैं। लेकिन पुलिस में तैनात जब उनके भाई का तबादला हुआ तो उन्हीं के साथ 1984 में वे उरई (जालौन) आ गए। 1985 में ग्रेजुएशन में दाखिला लिया। 1986 में उरई के डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्र संघ चुनाव लड़ा लेकिन सफल नहीं हुए। वो एबीवीपी से जुड़े रहे।
‘कांग्रेस सिंह’ से कैसे बने ‘स्वतंत्र देव’
पहले स्वतंत्र देव सिंह का नाम कांग्रेस सिंह था। संघ ने उनका नाम स्वतंत्र देव सिंह रख दिया। यह नाम स्वतंत्र भारत अखबार से ही प्रेरित था, जिसमें कांग्रेस सिंह काम किया करते थे। इस तरह लोग उन्हें स्वतंत्र देव सिंह के नाम से जानने लगे।
2014 में हुए आम चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने स्वतंत्र देव को उत्तर प्रदेश में होने वाली रैलियों के आयोजन का काम सौंप दिया। बताते हैं कि इसी वजह से वो नरेंद्र मोदी व अमित शाह के करीब आ गए।