जुबिली स्पेशल डेस्क
पटना बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है। ऐसे में यहां पर सियासी पारा लगातार चढ़ा हुआ है। नीतीश कुमार फिर से सीएम बनने की चाहत रखते हैं तो दूसरी तरफ तेजस्वी यादव इस बार सत्ता की कुर्सी तक जाने के लिए पूरा जोर लगायेंगे।
नीतीश कुमार जनता के बीच जा रहे हैं और इसी के तहत प्रगति यात्रा निकाली है। इस यात्रा के तहत वो बिहार की जनता की नब्ज को टटोल रहे हैं। बीजेपी कह रही है कि बिहार में अगला चुनाव एक बार फिर नीतीश कुमार के साथ ही लड़ा जायेगा।
नीतीश कुमार भी बीजेपी के हर मूवमेंट पर अपनी पैनी नजर बनाये हुए है। दरअसल बीजेपी चाहती है कि नीतीश कुमार केंद्र की मोदी सरकार को अपना समर्थन देते रहे हैं और इस बार वो पलटी न मारे इसलिए उनको अपने साथ रखने का कोई मौका बीजेपी गवाना नहीं चाहती है।दूसरी तरफ सभी प्रमुख दल अभी से एक्टिव है तो वहीं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी यहां पर राजनीतिक जमीन को तलाश कर रही है।
इसको लेकर खुद ओवैसी काफी सक्रिय है और लालू नीतीश का खेल बिगाड़ने के लिए ‘हैदराबादी प्लान’ तैयार कर रहे हैं।
बिहार में ओवैसी अपनी पार्टी के संगठन को मजबूत कर रहे हैं और इसके तहत वो यहां पर दम-खम के साथ चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
उनके द्वारा मिली जानकारी के अनुसार पूरे बिहार में अपने उम्मीदवारों को उतारने का मन ओवैसी ने बनाया है। उनकी इस तरीके से लालू नीतीश को नुकसान हो सकता है।
पार्टी की नजर मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों पर होगी। इसको लेकर कार्यकर्ताओं के बीच बातचीत चल रही है। ओवैसी कम से 50 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने का मन बना रहे हैं।
क्या है AIMIM का “हैदराबादी प्लान”?
AIMIM बिहार विधानसभा चुनाव के लिए “हैदराबादी प्लान” के तहत रणनीति बना रही है। यह प्लान 1986 के हैदराबाद मेयर चुनाव से प्रेरित है, जब पार्टी ने एक खास चुनावी दांव खेला था और वह सफल भी रहा।
हैदराबाद में कैसे कामयाब हुआ यह प्लान?
1986 में AIMIM ने कालरा प्रकाश राव को मेयर बनाया। इसके बाद 1987 में अनुमुला सत्यनारायण और 1989 में अल्लामपल्ली पोचैया मेयर बने। पार्टी ने लगातार 3 बार हिंदू उम्मीदवारों को मेयर बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि AIMIM सभी समुदायों की पार्टी है। बाद में मीर जुल्फिकार अली और मोहम्मद मुबीन भी मेयर बने।
बिहार में AIMIM की रणनीति
अब AIMIM बिहार में इसी “हैदराबादी प्लान” को लागू करने की तैयारी कर रही है।जहां पार्टी का संगठन मजबूत है, वहां चुनाव लड़ा जाएगा।AIMIM उन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारेगी, जहां उसे जीत की संभावना दिखेगी।इस रणनीति के जरिए पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।