प्रो. अशोक कुमार
कुछ लोग यह भ्रम फैलाते हैं कि विदेश में शिक्षा प्राप्त करना भारतीय संस्कृति के लिए घातक है। हालाँकि, यह एक गलत धारणा है।
भ्रम के कारण: सांस्कृतिक भिन्नता: विदेश में, छात्रों को एक अलग संस्कृति और जीवन शैली का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों को डर लगता है कि यह सांस्कृतिक भिन्नता भारतीय मूल्यों और परंपराओं को कमजोर कर सकती है।
पश्चिमी प्रभाव: पश्चिमी देशों में, भौतिकवाद और व्यक्तिवाद को अधिक महत्व दिया जाता है। कुछ लोगों को डर लगता है कि भारतीय छात्र इन मूल्यों से प्रभावित हो सकते हैं और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भूल सकते हैं।
गलत सूचना: गलत सूचना के कारण, कुछ लोग मानते हैं कि विदेश में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र अपनी संस्कृति को त्याग देते हैं। यह गलत है, क्योंकि अधिकांश भारतीय छात्र अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हैं और अपनी परंपराओं का सम्मान करते हैं।
वास्तविकता: सांस्कृतिक आदान-प्रदान: विदेश में शिक्षा प्राप्त करने से छात्रों को विभिन्न संस्कृतियों के बारे में जानने और समझने का अवसर मिलता है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान छात्रों को अधिक सहिष्णु और खुले विचारों वाला बनाता है। भारतीय छात्र विदेशों में अपनी संस्कृति का प्रचार करते हैं। वे भारतीय त्योहारों, भोजन, संगीत और नृत्य को साझा करते हैं, जिससे भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलता है। छात्र भारतीय त्योहारों, भोजन, संगीत और नृत्य को साझा करते हैं, जिससे भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलता है।
वैश्विक दृष्टिकोण: विदेश में शिक्षा प्राप्त करने से छात्रों को वैश्विक स्तर पर सोचने और काम करने की क्षमता विकसित होती है। यह उन्हें वैश्विक नागरिक बनने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगदान करने के लिए तैयार करता है। भारतीय संस्कृति का संरक्षण: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विदेश में शिक्षा प्राप्त करने का मतलब अपनी भारतीय संस्कृति को त्यागना नहीं है। विदेश में शिक्षा प्राप्त करने से छात्रों को नए कौशल सीखने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर मिलता है।
इससे उनके करियर के अवसर बढ़ते हैं और वे वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान करने में सक्षम होते हैं। विदेश से शिक्षा प्राप्त भारतीय छात्र जब भारत वापस आते हैं, तो वे अपने ज्ञान और कौशल से देश के विकास में योगदान करते हैं। वे नई तकनीकें, विचार और व्यवसाय लाते हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।इसलिए, यह कहना गलत है कि विदेश में शिक्षा प्राप्त करना भारतीय संस्कृति के लिए घातक है। बल्कि, यह छात्रों को एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है और भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में मदद करता है।
(लेखक पूर्व कुलपति कानपुर , गोरखपुर विश्वविद्यालय , विभागाध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर रह चुके हैं)