प्रो. अशोक कुमार
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) प्रमाणन देश भर में उच्च संस्थानों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा के मानक का मूल्यांकन करने का एक उपाय है.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग , यूजीसी , ने साल 1994 में एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय और संकाय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद) नामक परिषद से प्रमाणन प्राप्त करना होगा. यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार, अब देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मान्यता लेना जरूरी है.
अगर किसी भी संस्थान ने इसमें आवेदन कर ग्रेडिंग नहीं कराई है तो उसको किसी भी तरह से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेता है. हाल ही मे देश भर में उच्च शिक्षण संस्थानों की ग्रेडिंग के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के जरिये होने वाली जांच में बड़े भ्रष्टचार का खुलासा सीबीआई , केंद्रीय जांच ब्यूरो ने किया है। जब टीम द्वारा संस्थानों का भ्रमण किया जाता है तो इसी दौरान भ्रष्टाचार की आशंका रहती है.
एक-दूसरे के संपर्क में आने से संस्थान की ओर से टीम को उपहार आदि दिए जा सकते हैं. इससे ग्रेडिंग प्रभावित हो सकती है. सीबीआई ने रिश्वत लेकर शिक्षण संस्थानों को ए++ रेटिंग देने के मामले में यूपी के गौतमबुद्धनगर समेत देशभर में 20 ठिकानों पर छापे मारे.
इस मामले में की गई छापेमारी में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की इंस्पेक्शन कमेटी के अध्यक्ष और जेएनयू के एक प्रोफेसर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है.
इससे पहले साल 2023 के मार्च में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के चेयरपर्सन भूषण पटवर्धन ने कई संस्थानों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल) ग्रेडिंग देने में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था. रिश्वत मामले में सीबीआई की हालिया गिरफ्तारी के बाद कई को हटाया गया !
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) ) ने हाल ही में 5,000 मूल्यांकनकर्ताओं में से लगभग 900 को हटा दिया है, जो राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) ग्रेड जारी करने से पहले उच्च शिक्षा संस्थानों का दौरा करते हैं और उनका मूल्यांकन करते हैं.
सूत्रों के अनुसार करीब 900 मूल्यांकनकर्ताओं को कई कारणों से हटाया गया है। कुछ सक्रिय नहीं पाए गए या “विजिट्स स्वीकार नहीं कर रहे थे”, और कुछ ने रिपोर्ट ठीक से तैयार नहीं की थी, जिसका मतलब है कि कुछ मामलों में, उच्च स्कोर देने के कारणों को स्पष्ट रूप से उचित ठहराए बिना कुछ मापदंडों पर शीर्ष स्कोर दिए गए थे, सूत्र ने कहा, और कहा कि कुछ मूल्यांकनकर्ताओं के पास केवल आंशिक डेटा ही उपलब्ध था.
“राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) ने अप्रैल-मई 2023 में कुछ मूल्यांकनों की समीक्षा शुरू की, जब बहुत अधिक ए++ ग्रेड दिए जाने के बारे में फीडबैक आ रहा था. हमने ग्रेडिंग के गुणात्मक और मात्रात्मक पहलुओं को देखना शुरू किया और यह जांचने का फैसला किया कि क्या कुछ मामलों में दोनों के बीच कोई उल्लेखनीय अंतर है.
रिश्वतखोरी के मामलों ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) ग्रेडिंग प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. समीक्षा से यह सुनिश्चित होगा कि केवल योग्य संस्थानों को ही उच्च ग्रेड मिले. यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है, तो संस्थानों को दी गई ग्रेडिंग की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाती है. इससे उन संस्थानों को अनुचित लाभ मिल सकता है जिन्होंने रिश्वत दी, जबकि ईमानदार संस्थानों को नुकसान हो सकता है.
जिन संस्थानों का मूल्यांकन भ्रष्ट मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा किया गया था, उनका पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन आवश्यक है। समीक्षा से उन संस्थानों की पहचान करने में मदद मिलेगी जिन्हें गलत तरीके से उच्च ग्रेड मिले हैं.
इससे यह सुनिश्चित होगा कि संस्थानों को उनकी वास्तविक गुणवत्ता के आधार पर ग्रेडिंग मिले.
प्रश्न यह भी है कि क्या एक संस्थान की गुणवत्ता 5 वर्षों तक समान रह सकती है?
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) को मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए. भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए.
संस्थानों की गलत ग्रेडिंग से छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए, और इसके लिए निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है.
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) ग्रेडिंग की समीक्षा के विपक्ष में तर्क दिया जाता है की पिछले 5 वर्षों की सभी ग्रेडिंग की समीक्षा करना एक जटिल और समय लेने वाला काम होगा. इसमें बड़ी संख्या में संस्थानों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा.
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के पास सीमित संसाधन हैं और इतने बड़े पैमाने पर समीक्षा करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी. कुछ संस्थान कानूनी कार्रवाई का सहारा ले सकते हैं, जिससे समीक्षा प्रक्रिया में और देरी हो सकती है.
परिषद ने संस्थानों का मूल्यांकन करने और उच्च शिक्षा संस्थानों को ग्रेड देने के लिए एक नई नीति अपनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें चरणबद्ध तरीके से भौतिक निरीक्षण किया जाएगा.
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के सूत्रों ने बताया कि विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की प्रस्तावित ग्रेडिंग नीति-परिपक्वता आधारित ग्रेडेड लेवल का उद्देश्य भौतिक निरीक्षण को समाप्त करना है, क्योंकि उच्च ग्रेड के बदले मूल्यांकनकर्ताओं को रिश्वत देने जैसी “भ्रष्ट प्रथाओं” का पता ज्यादातर ग्रेडिंग प्रक्रिया के इस चरण में चला है. सरकार और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) को सभी पहलुओं पर विचार करके उचित निर्णय लेना होगा.
( लेखक पूर्व कुलपति कानपुर , गोरखपुर विश्वविद्यालय , विभागाध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर हैं)