जुबिली न्यूज डेस्क
यूपी के छात्रों के लिए एक हैरान कर देने वाला एक सर्वे रिपार्ट सामने आई है. जो काफी डराने वाली है. रिपोर्ट के मुताबिक हाईस्कूल और इंटर के छात्र कक्षा दो के स्तर की हिंदी नहीं पढ़ पाते। वाराणसी में ऐसे छात्रों की संख्या 12 प्रतिशत है तो हाथरस में 27 प्रतिशत। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट में ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं।
बता दे कि पहली बार 14 से 18 वर्ष के किशोरों पर के पढ़ने के स्तर पर असर ने यह रिपोर्ट जारी की है। बियोंड द बेसिक नाम से यह रिपोर्ट देश के 26 राज्यों के 28 जिलों में नमूने के आधार पर जारी की गई है। इससे पहले 6 से 14 साल तक के बच्चों पर असर रिपोर्ट जारी की जाती थी।गणित और अंग्रेजी में और पीछे
यूपी के दो जिलों वाराणसी और हाथरस को इस सर्वे में शामिल किया गया था। इसमें 14 से 18 वर्ष के किशोरों की सीखने की क्षमता की जांच की गई जो सामान्य तौर पर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ते हैं। इस आयु वर्ग के छात्र सामान्य तौर पर नौवीं से 12 वीं कक्षा में पढ़ते हैं। वाराणसी में गणित का स्तर तो और भी कम पाया गया। यहां 14 से 18 वर्ष के 46.40 प्रतिशत छात्र भाग के सवाल नहीं कर पाते। इसी तरह 41.50 प्रतिशत छात्र अंग्रेजी के सामान्य वाक्य नहीं पढ़ पाते।
27.70 प्रतिशत बच्चे ही सरकारी संस्थानों में पढ़ते हैं
हाथरस में भाग के सवाल न करने वालों का प्रतिशत 44.40 और अंग्रेजी के सामान्य पाठ न पढ़ने वालों का प्रतिशत 43.20 है। कई बिंदुओं पर की गई जांच में यह भी पाया गया कि वाराणसी में 14 से 18 वर्ष के 91.20 प्रतिशत किशोर किसी न किसी शिक्षण संस्थान में पढ़ते हैं। इनमें से 30.60 प्रतिशत ही सरकारी संस्थानों में पढ़ते हैं। हाथरस में 81.70 प्रतिशत किशोर शिक्षण संस्थानों में दाखिल हैं। इनमें से 27.70 प्रतिशत ही सरकारी संस्थानों में पढ़ते हैं। रिपोर्ट में मोबाइल की उपलब्धता और डिजिटल लर्निंग की भी जांच की गई है।
हर-घर हो चुकी हैं स्मार्टफोन की पहुंच
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 90% युवाओं के घर में स्मार्टफोन हैं और उतने ही युवा इसका प्रयोग करना जानते हैं। लड़कियों (19.8%) की तुलना में दोगुने से अधिक लड़कों (43.7%) के पास खुद का स्मार्टफोन है। लड़कों की तुलना में कम लड़कियां बताती हैं कि वे स्मार्टफोन या कंप्यूटर चलाना जानती हैं। 90.5% ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया का प्रयोग किया है। लड़कियों (87.8%) की तुलना में लड़कों (93.4%) में इसका अनुपात ज्यादा है। सुरक्षा संबंध्त सेटिंग्स के बारे में ज्यादातर छात्र जानते हैं। दो तिहाई ने स्मार्टफोन का प्रयोग पढ़ाई से संबंधित गतिविधियों के लिए किया। वहीं, जिनके घर पर कंप्यूटर या लैपटॉप है, उनकी संख्या करीब 9% ही है।