Saturday - 22 February 2025 - 3:07 PM

यूएसएड की फंडिंग को लेकर विवाद, डोनाल्ड ट्रंप ने फिर कही ये बात

जुबिली न्यूज डेस्क

यूएसएड की फंडिंग को लेकर विवाद अब और गहरा गया है, खासकर भारत में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते। बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे पर हमलावर हो गए हैं, और इस विवाद में बांग्लादेश का भी नाम जुड़ा है। इस विवाद का मुख्य कारण यह है कि यूएसएड (USAID) के माध्यम से कुछ ऐसे कार्यक्रमों को फंडिंग दी जा रही है, जिनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव होता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार तीसरे दिन ‘वोटर टर्नआउट’ के लिए कथित रूप से भारत को मिले 21 मिलियन डॉलर का मुद्दा उठाया है. भारत में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी नोकझोंक चल रही है. ट्रंप का यह ताजा बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें दावा किया गया है कि 2022 में 21 मिलियन डॉलर का अनुदान भारत के लिए नहीं बल्कि बांग्लादेश के लिए मंजूर किया गया था.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मेरे मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को ‘वोटर टर्नआउट’ के लिए 21 मिलियन डॉलर दिए जा रहे हैं. हम भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर दे रहे हैं. हमारा क्या? मैं भी तो मतदान बढ़ाना चाहता हूं.”

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने बांग्लादेश को मिले 29 मिलियन डॉलर अमेरिकी मदद का भी जिक्र किया. ट्रंप ने कहा कि बांग्लादेश को 29 मिलियन डॉलर राजनीतिक परिदृश्य में स्थिरता लाने के लिए दिए गए. उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर एक ऐसी फर्म को दे दिए गए, जिसके बारे में किसी ने कभी सुना ही नहीं था. उस फर्म में केवल दो लोग काम कर रहे थे.

“बता दें कि अमेरिकी सरकार की एजेंसी USAID की ओर से कथित रूप से भारत को दिए गए मदद का मुद्दा देश में राजनीतिक टकराव की वजह बन गया है।

इंडिया टुडे ग्रुप के डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने अमेरिकी फंडिंग पर एक बड़ा खुलासा किया है. 2001 से 2024 के बीच भारत को 2.9 बिलियन डॉलर की फंडिंग मिली, जिसमें से 1.3 बिलियन डॉलर पिछले 10 वर्षों में आए. चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए 2013 से 2018 के बीच 4,84,000 डॉलर खर्च किए गए. यह जानकारी अमेरिकी सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से ली गई है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दावा किए गए 23 मिलियन डॉलर के आंकड़े की पुष्टि नहीं हो पाई है.

विवाद का मुख्य बिंदु:

यूएसएड की फंडिंग से जुड़ा यह विवाद उस समय सामने आया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों ने यह आरोप लगाया कि यूएसएड के माध्यम से भारत में कुछ विशेष राजनीतिक विचारधाराओं और गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया कि भारत में कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के कुछ नेता यूएसएड से जुड़ी फंडिंग प्राप्त करते हैं, जो उनकी राजनीति और उनके विचारधाराओं को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप:

  1. बीजेपी का आरोप:

    • भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल यूएसएड से फंड प्राप्त कर रहे हैं, जो भारतीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है। बीजेपी का यह भी कहना है कि इस फंडिंग के जरिए अमेरिका भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की बात हो सकती है।
    • बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि यूएसएड की फंडिंग से देश की सांस्कृतिक और राजनीतिक नीतियों को प्रभावित किया जा सकता है, और यह विदेशी एजेंडों के लिए काम करने जैसा है।
  2. कांग्रेस का पलटवार:

    • कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी के पास यूएसएड की फंडिंग को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं है। कांग्रेस का कहना था कि यह एक राजनीतिक रोटियां सेंकने का मुद्दा है और बीजेपी इस मुद्दे का इस्तेमाल करके विपक्षी दलों को निशाना बना रही है।
    • कांग्रेस ने यह भी कहा कि भारत की राजनीति पूरी तरह से स्वतंत्र है, और यह आरोप निराधार हैं कि अमेरिकी एजेंसियों का भारतीय राजनीति पर कोई प्रभाव है।

बांग्लादेश का नाम:

इस विवाद में बांग्लादेश का नाम भी सामने आया है, जब कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि यूएसएड द्वारा फंड की गई कुछ परियोजनाओं का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ये बांग्लादेश जैसे देशों में भी समान गतिविधियों को बढ़ावा दे रही हैं। बांग्लादेश में भी यूएसएड के माध्यम से कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को समर्थन दिया गया है, जो भारतीय संदर्भ में भी विवाद का कारण बन रहे हैं।

राजनीतिक दृष्टिकोण:

इस पूरे विवाद ने भारत और अमेरिका के रिश्तों पर भी सवाल उठाए हैं। जहां एक ओर अमेरिका भारत का रणनीतिक साझेदार है, वहीं दूसरी ओर यह आरोप लग रहे हैं कि अमेरिकी सहायता एजेंसी यूएसएड का इस्तेमाल भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए किया जा रहा है। इसने दोनों देशों के बीच संवेदनशीलता पैदा की है, और भारत में एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक सवाल को जन्म दिया है।

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