डा. रवीन्द्र अरजरिया देश के विभिन्न प्रदेशों में इन दिनों सड़क सुरक्षा माह का विशेष आयोजन किया जा रहा है। सरकारी विभागों में परिवहन, पुलिस और नगर निकायों को विशेष बजट आवंटित करके उनके उत्तरदायित्वों को निर्धारित किया गया है। यानी इस माह में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के …
Read More »जुबिली डिबेट
जल जीवन मिशन में कहाँ हैं महिलायें ?
हर घर नल से जल पहुँचाने के संकल्प के प्रधानमंत्री ने दो साल पहले जल जीवन मिशन की घोषणा की थी और उसके लिए बड़े बजट का निर्धारण भी किया जा चुका है, लेकिन इस मिशन के जरिए कहीं पानी के निजीकरण का रास्ता तो नहीं खुलेगा? क्या समुदाय का …
Read More »डंके की चोट पर : …तो संसद आवारा हो जाती है और अदालतें सौदागर
शबाहत हुसैन विजेता आज 14 फरवरी है. संत वैलेंटाइन का जन्मदिन. वही संत वैलेंटाइन जिसे प्यार करने के जुर्म में मौत की सज़ा दी गई थी. अपने मुल्क से प्यार करने वालों को भी मौत की सज़ा के लिए 14 फरवरी का दिन ही मुकर्रर किया गया था. 14 फरवरी …
Read More »पेरिस समझौते के लक्ष्य पूरे हुए तो बच सकती हैं लाखों जानें
डॉ. सीमा जावेद एक स्वस्थ जनसंख्या काफ़ी कुछ कहती है अपने आस पास के पर्यावरण और जलवायु के बारे में। आप अपने शरीर का ख्याल अगर सही मायने में रख रहे हैं, तो आप पृथ्वी और पर्यावरण का ख्याल रख रहे हैं। इस बात की तस्दीक करती है ये ताज़ी …
Read More »फिर सबक दे गया उत्तराखंड का हादसा
कृष्णमोहन झा देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में 2013 की केदारनाथ त्रासदी को प्नकृति से खिलवाड़ का नतीजा तो बताया गया था लेकिन सरकार ने उस भयावह हादसे से कोई सबक लेने की आवश्यकता महसूस नहीं की और प्रकृति से खिलवाड़ का वह सिलसिला निरंतर चलता रहा । इसलिए 2013 …
Read More »भारत में जीवाश्म ईंधन से होने वाला वायु प्रदूषण है 30.7% मौतों का कारण
डॉ. सीमा जावेद आप और हम जब अपनी पेट्रोल और डीज़ल की गाड़ी में बैठ आराम से इधर से उधर जाते हैं तब हमारी गाड़ी से निकलने वाले धुआं दुनिया में होने वाली हर पांचवीं मौत का ज़िम्मेदार बन जाता है। बात भारत की करें तो यहाँ जीवाश्म ईंधन के …
Read More »लोकतंत्र को कठपुतली बनाने पर तुला भीडतंत्र
डा. रवीन्द्र अरजरिया स्वाधीनता के बाद देश को सुव्यवस्था देने की गरज से राजशाही के स्थान पर लोकशाही की स्थापना की गई। तात्कालिक परिस्थितियों में संविधान की रचना हुई। यह अलग बात है कि संविधान की रचना के दौरान किन लोगों को हाशिये पर रखने का षडयंत्र हुआ और कौन …
Read More »डंके की चोट पर : क्या खालिस्तान के सपने को फिर मिल रहा है खाद-पानी
शबाहत हुसैन विजेता खालिस्तान का सपना तो 1984 में ही मर गया था. इस सपने ने कितना खून बहाया उसका हिसाब जोड़ पाना भी बहुत मुश्किल बात है. यह सपना तोड़ने के लिए हमें प्रधानमंत्री की कुर्बानी देनी पड़ी थी. यह सपना टूटने के बाद पंजाब में फिर से खुशहाली …
Read More »क्या किसान आंदोलन दे पायेगा जयंत चौधरी को राजनीतिक दिशा ?
प्रीति सिंह 28 जनवरी को किसान नेता राकेश टिकैत की भावनात्मक अपील के बाद जिस तरह से किसान आंदोलन को संजीवनी मिली ठीक उसी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आए दिन हो रहे किसानों के महापंचायतों ने इन इलाकों में राजनीतिक जमीन खो चुकी आरएलडी को संजीवनी दी है। किसान …
Read More »म्यांमार में ‘सू की’ की अपार लोकप्रियता से घबराई सेना
कृष्णमोहन झा भारत के एक पड़ोसी देश म्यांमार में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार का तख्ता पलट कर खुद ही सत्ता पर कब्जा जमा लेने की सेना की कार्रवाई का देश की जनता उग्र विरोध कर रही है। लोग सड़कों पर उतर कर अपना विरोध व्यक्त कर रहे हैं। …
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