अशोक कुमार यह सोचना आम है कि इस नए डिजिटल युग में प्रिंट की दुनिया खो गई है, लेकिन यह सच से परे नहीं हो सकता। हो सकता है कि छपाई ने सदियों पहले अपना बीज बोया हो, लेकिन व्यावसायिक मुद्रण उद्योगों की प्रगति के साथ, सफल विपणन के लिए …
Read More »जुबिली डिबेट
पड़ोसियों के साथ महासंघ वक्त की मांग है!
डा सी पी राय क्या अब उचित समय है की भारत, पाकिस्तान, बंगला देश और संभव हो तो नेपाल ,भूटान और श्रीलंका का भी एक ,महासंघ बन जाना चाहिये ? यद्दपि बंगला देश ने काफी तरक्की किया है और मजबूत भी हुआ है. नेपाल भारत और चीन के बीच झूल …
Read More »बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी तो क्या होगा !
नवेद शिकोह @naved.shikoh बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने जन्मदिन के मौके पर ऐलान कर दिया कि वो आगामी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेंगी। इसके साथ ही अटकलों पर विराम लग गया और तय हो गया कि भाजपा के खिलाफ एकजुट होने वाली सियासी ताकतों का वो हिस्सा बसपा नहीं …
Read More »क्या हुआ धर्म विशेष वाले राष्ट्रों का ?
डा. सी.पी राय जिस भी देश में किसी धर्म विशेष का राज हुआ , धर्म विशेष के सर्वोत्तम होने के नाम पर और धर्म विशेष का ठेका लेने वाले कट्टरपंथी लोग राज पर क़ाबिज़ हो गए उन देशो को क्या क्या मिला ? संगठन विशेष का आदेश की संविधान और …
Read More »जोशीमठ त्रासदी के लिए कौन जिम्मेदार?
डा. सीमा जावेद अभी कुछ समय पहले तक उत्तराखंड का रैनी गाँव सुर्खियों में था। और अब, पास का ही जोशीमठ खबरों में है और उन्हीं वजहों से।फिलहाल प्रशासन वहाँ से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्स्थापित करने की कवायद में है और विशेषज्ञ अपनी अपनी समझ से समस्या के …
Read More »यूपी में उच्च शिक्षा रसातल की ओर, नई शिक्षा नीति बनी नो एजूकेशन नीति..
कुलपतियों की मनमानी पर राज्य सरकार की स्थिति मूकदर्शक की.. दक्षिण भारतीय राज्यों के मुकाबले उत्तर भारतीय राज्यों में उच्च शिक्षा की गति रसातल की ओर है। भारत जोड़ो यात्रा के नायक राहुल गांधी भी बेरोजगारी के पीछे शैक्षिक कारणों को गिना रहे हैं। देश की नई शिक्षा नीति …
Read More »ओहदेदारों के रुतवे तले पिस रही है आम आवाम
भविष्य की आहट / डा. रवीन्द्र अरजरिया स्वाधीनता के बाद भी देश में दोहरे मापदण्डों का पटाक्षेप नहीं हो रहा है। राजनेताओं, अधिकारियों तथा चर्चित चेहरों के लिए विशेष व्यवस्थायें व्यवहार में आती हैं जबकि आम नागरिक को अपने अधिकारों की सुरक्षित हेतु लम्बी जद्दोजेहद करना पडती है। अंग्रेजों के …
Read More »स्मार्टफोन ने छीन ली सैकड़ो सैनिको की जिन्दगी, जानें तबाही का सच
जुबिली न्यूज डेस्क स्मार्टफोन आज के दौर में जिन्दगी का बेहद ही खास हिस्सा बन गया है. कहा जाता है कि किशोरों के अकेलेपन, सड़क दुर्घटनाओं, कइ्र तरह की बीमारियों के लिए स्मार्टफोन जिम्मेदार है. लेकिन ये फोन के जीतने फायदे है उतने नुक्सान भी है. वहीं इस स्मार्टफोन का …
Read More »जीरो डिग्री में हाफ टी-शर्ट वाला…
नवेद शिकोह @naved.shikoh हार मान लेना मौत है और उम्मीद ज़िन्दगी है। नाउम्मीदी ख़त्म हो जाने का कारण बनती है, उम्मीद ज़िन्दा होने की अलामत है। मेडिकल सांइस कहती हैं कि जब तक सांसें बची हों कोशिश का सिलसिला जारी रखिए। सियासत भी यही कहती हैं। कभी भाजपा की सियासत …
Read More »चुनावी और सियासी साल होगा 2023
नवेद शिकोह @naved.shikoh चंद घंटों के बाद शुरू होने वाला 2023 सियासी सरगर्मियों और चुनावों के नाम होगा। इस वर्ष देश के क़रीब दस राज्यों में चुनाव हो सकते हैं। 2024 के शुरू में ही लोकसभा चुनाव होने हैं इसलिए 2023 को लोकसभा का चुनावी वर्ष भी मान सकते हैं। …
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