सुरेन्द्र दूबे ऐसा इस देश में पहली बार हो रहा है कि कोई हड़ताली संगठन मांग कर रहा है कि मुख्यमंत्री उससे माफी मांगे। जी हां, मैं पश्चिम बंगाल के हड़ताली डॉक्टरों की बात कर रहा हूं। हड़ताल सही है या गलत, इस पर बाद में बात करूंगा, पहले इस …
Read More »जुबिली डिबेट
बेपटरी राजनीति और राजनीति का कीड़ा
प्रांशु मिश्रा बीते कुछ सालों में मुल्क की राजनीति बेपटरी हुई है, लेकिन राजनीति के कीड़े ने हर सेक्टर में जबरदस्त डंक मारी की है पत्रकार, वकील, मास्टर और डॉक्टर। हर जगह संगठनों की बाढ़ आ गई है और तमाम स्वयंभू एरिया कमांडर टाइप नेता मोर्चा संभाले हैं। सेल्फी, फेसबुक …
Read More »कांग्रेस में अध्यक्षी के लिए राहुल के बाद कौन ?
केपी सिंह कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर व्याप्त अटकलबाजी अभी खत्म नहीं हो पा रही है। पिछले बुधवार को काग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि राहुल गांधी अध्यक्ष थे और बने रहेंगे। उनकी पूरे विश्वास के साथ उच्चरित इस घोषणा से जाहिर हुआ था कि राहुल …
Read More »यह भगवान की सुरक्षा का सवाल है
शबाहत हुसैन विजेता एनसीआर में एक भरोसेमंद अस्पताल है। अगर आपकी जेबें पैसों से भरी हैं और इस अस्पताल ने कंधे पर हाथ रख दिया है तो आपको अपनी ज़िन्दगी को लेकर बहुत ज्यादा डरने की ज़रूरत नहीं है। यह अस्पताल ऐसे क्रिटिकल मरीजों को अपने यहां भर्ती कर लेता …
Read More »मरीजों को तड़पता छोड़ कितनी जायज है डॉक्टरों की हड़ताल
डा. रवीन्द्र अरजरिया पश्चिम बंगाल के कोलकता स्थित नीलरत्न सरकार मेडिकल कालेज में विगत 10 जून को मरीज की मृत्यु के बाद हुए विवाद ने अहम के युद्ध की शक्ल ले ली है। मृतक के परिजनों के द्वारा डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गालीगलौज की थी जिस पर …
Read More »मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
के पी सिंह मन के हारे हार है, मन के जीते जीत यह कहावत देश के विपक्षी दलों पर पूरी तरह लागू होती है। लोकसभा चुनाव में हार को लेकर प्रतिपक्षी दलों में विचार मंथन की जो कवायद चलती दिख रही है उसको देखते हुए यह कहना मुश्किल लगता है …
Read More »राजनाथ सिंह सूर्य : यादों के पन्नो में
राजीव ओझा सुबह साथी का मेसेज मिला, आदरणीय राजनाथ सिंह सूर्य नहीं रहे। सुनकर झटका लगा। उनके सानिध्य में पत्रकारिता के दिन न्यूज़ रील की तरह याद आते गए। मेरे पत्रकारिता के करियर को गति देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके लिए सदा आभारी रहूँगा। बात 1986 की है …
Read More »पुलिस के औजार साफ सुथरे करने में क्यों दिलचस्पी नहीं दिखा रही योगी सरकार
के पी सिंह लखनऊ में कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारी व पुलिस प्रमुखों के साथ की गई बैठक कर्मकांडी रही जिससे जमीनी स्तर पर वातावरण सुधरने की स्थिति जनमानस को नजर आयेगी इसके आसार बहुत कम हैं। बैठक में मुख्यमंत्री ने …
Read More »मुखौटा नहीं मूल्य है धर्मनिरपेक्षता
अशोक माथुर भाजपा लगातार कहती रही है कि कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता “छद्म धर्मनिरपेक्षता” है और वह ही सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता लाएगी। आज के दौर में धर्मनिरपेक्षता का मर्म समझा जाना जरूरी है। विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द की गारंटी की बात संविधान की प्रस्तावना में भी उल्लिखित है। धर्मनिरपेक्षता केवल अल्पसंख्यकों …
Read More »कठुआ, टप्पल, सुप्रीम कोर्ट और ग़ालिब का शेर
उत्कर्ष सिन्हा पिन्हां था दाम-ए-सख़्त क़रीब आशियान के उड़ने न पाए थे कि गिरफ़्तार हम हुए यानी “घर के पास ही जंजीरें छिपी हुई थीं, जिससे हम उड़ने से पहले ही उनमें फंसकर बंदी बन गए.’ मिर्ज़ा ग़ालिब का ये शेर उस फैसले की पहली लाइने हैं , जो कठुआ में …
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